

हापुड़ में वन विभाग की मनमानी से ठप हुआ कारोबार, मजदूरों का भविष्य संकट में
📍 हापुड़, उत्तर प्रदेश | 11 सितम्बर 2025
हापुड़ जिले में लकड़ी कारोबारियों और वन विभाग के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। लकड़ी व्यापारियों ने वन विभाग के अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वे टीपी (ट्रांजिट पास) जारी करने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं। पिछले 10 दिनों से व्यापारियों का कारोबार पूरी तरह ठप है। इस बंदी की सीधी मार उन सैकड़ों मजदूरों पर पड़ी है जो लकड़ी मंडियों और गोदामों में दिहाड़ी पर काम करते हैं।
अवैध वसूली का आरोप
व्यापारियों का आरोप है कि डीएफओ कार्यालय में तैनात अधिकारी अजय मनमाने तरीके से कारोबारियों से रुपये की मांग कर रहे हैं। यदि व्यापारी उनकी मांग को पूरा नहीं करते, तो उनके ट्रांजिट पास रोक दिए जाते हैं, जिससे लकड़ी का परिवहन रुक जाता है। बिना पास के न तो माल मंडी से बाहर जा सकता है और न ही नई खेप आ सकती है। व्यापारियों का कहना है कि वे वैध प्रक्रिया के तहत कारोबार कर रहे हैं, इसके बावजूद उनसे जबरन रुपये वसूले जा रहे हैं।
मजदूरों पर संकट
लकड़ी मंडी के एक मजदूर ने बताया कि “पिछले दस दिनों से हमें काम नहीं मिला। घर में राशन डालना मुश्किल हो रहा है। अगर जल्द ही काम शुरू नहीं हुआ तो परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा।” मजदूरों का दर्द साफ झलकता है कि वन विभाग की मनमानी का खामियाजा सिर्फ व्यापारी ही नहीं बल्कि गरीब परिवार भी भुगत रहे हैं।
व्यापारियों का विरोध और विधायक का हस्तक्षेप
समस्या से परेशान होकर लकड़ी व्यापारी एकजुट हुए और स्थानीय विधायक विजयपाल आढ़ती का घेराव किया। व्यापारियों ने विधायक को बताया कि विभागीय अधिकारियों के दबाव में कारोबार करना असंभव हो गया है। इस पर विधायक ने तुरंत डीएफओ को फोन कर नाराजगी जाहिर की और साफ कहा कि व्यापारियों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विजयपाल आढ़ती ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली तो वह विधानसभा तक यह मुद्दा उठाएंगे। उनका कहना था कि “व्यापारियों और मजदूरों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। प्रशासन को तुरंत इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।”
आंदोलन की चेतावनी
व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों को तुरंत हटाया जाए।
प्रशासन पर सवाल
यह विवाद केवल एक विभागीय मनमानी का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की पोल भी खोलता है। सवाल यह उठता है कि यदि वैध व्यापार करने वाले कारोबारी और मजदूर ही परेशान रहेंगे तो राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार व्यवस्था पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा।
👉 कुल मिलाकर, हापुड़ का यह मामला इस बात का प्रमाण है कि जब विभागीय अफसर मनमानी करने लगते हैं तो उसका सबसे बड़ा शिकार आम जनता बनती है। अब देखना यह होगा कि विधायक की चेतावनी और व्यापारियों के दबाव के बाद क्या प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
✍️ रिपोर्ट : एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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